अति लघु घोटाला।
आजकल किसी को भूलवाकर पैसे ले लेना बहुत ही आसान हो गया है। इसमें हर कोई फँस जाता है चाहे वो कोई अनपढ़ हो, थोड़ा पढ़ा हो या बहुत पढ़ा हो। बहुत...
आजकल किसी को भूलवाकर पैसे ले लेना बहुत ही आसान हो गया है। इसमें हर कोई फँस जाता है चाहे वो कोई अनपढ़ हो, थोड़ा पढ़ा हो या बहुत पढ़ा हो। बहुत कम लोग ही हैं जो नहीं फँसते। कही कोई बिजनेसमैन करोड़ों रूपये लेकर भाग जाता और पूरा देश देखते रह जाता तो कही कोई नेता करोड़ों का घोटाला कर देता।इसमें अनपढ़ क्या, पढ़े लिखे उच्च पद पर बैठे लोग भी कुछ नहीं कर पाते। ये सब तो बहुत ही बड़े स्तर के घोटाले हैं लेकिन इसके अलावा भी एक घोटाला होता जो बहुत ही छोटे स्तर पर होता। यहां रुपए के साथ-साथ पैसों का भी घोटाला हो जाता। इस घोटाले में लोग बहुत ही आराम से पैसे दे देते। इसे ही अति लघु घोटाला कहा जाता। ऐसे घोटाले के कई सारे उदाहरण इस समाज में मौजूद है जिसका शिकार आम आदमी कभी ना कभी ज़रूर हुआ होगा।
कोल्ड ड्रिंक घोटाला एक ऐसा घोटाला है जो प्रायः ग्रामीण क्षेत्रों में होता। इस घोटाले में सबसे पहले आपको दुकान पर जाकर एक छोटी सी कोल्ड ड्रिंक खरीदना होता। जिसका दाम (सभी कर सहित) 12रूपये, 18रुपये या 20 रुपये होता लेकिन आपको वो क्रमशः 15रुपये, 20रुपये और 22रुपये की खरीदनी होगी और यही दाम वहां के हर एक दुकान में होता।
इस परिस्थिति में आपके पास साधारण तौर पर तीन रास्ते होते।
पहला ये कि आप दुकानदार के अनुसार पैसे दे कर सामान खरीदें।
दूसरा ये कि आप थोड़ा दूर किसी दूसरी बाज़ार में जाकर सामान खरीदें। चुकी इसमें ज्यादा वक्त और मेहनत दोनो लगेगी इसलिए आपको पहला विकल्प बेहतर लगता।
तीसरा ये कि आप बिना सामान लिए ही वापस आ जाएं। चुकी इसमें लक्ष्य पूर्ति नहीं होगी इसलिए आपको ये विकल्प सही नहीं लगता।
तो अंततः आप पहले विकल्प पर आ जाते। लेकिन आप इतने भी मूर्ख नहीं कि चुपचाप बिना किसी आपत्ति के पैसे दे देंगे। इसलिए सबसे पहले आपको पूछना होता कि जब इसका मूल्य कम है तो 2-3रुपए ज़्यादा क्यों ले रहें? आपको जवाब मिलेगा कि जो कोल्ड ड्रिंक आता वो ठंडा नहीं होता, इसे यहां लाकर ठंडा किया जाता जिसमे बिजली लगती और बिजली का पैसा भरना रहता इसलिए ठंडा करने का अतरिक्त मूल्य लगेगा। अगर आपको ठंडा कोल्ड ड्रिंक नहीं चाहिए तो आप इसके मूल मूल्य पर ले सकते हैं। अब भला जो ड्रिंक ठंडा ना हो वो कोल्ड ड्रिंक कैसा। इस तरह आपको पैसे दे देना होता।
अधिकतम खुदरा मूल्य (सभी कर सहित) जिसका अर्थ होता कि सामान को ले आने, ले जाने, उसको ठंडा करने और भी जो कुछ सेवाएं हैं सब इसी मूल्य में शामिल है। इस सामान का मूल्य इससे अधिक नहीं हो सकता। यदि कोई अधिक मूल्य पर विक्रय करता तो आप इसपर शिकाय कर सकतें हैं। लेकिन आप सोचेंगे कि 2रुपए में क्या रखा है । इस तरह से यह अति लघु कोल्ड ड्रिंक घोटाला संपन्न होता।
टॉफी घोटाला वो घोटाला है जो प्रायः शहर के मेडिकल स्टोर पर होता। अगर दुकानदार के पास एक रूपये कम हो तो वो टॉफी पकड़ा देता। यहां आपको बिना किसी आवश्यकता सामान लेना होता। लेकिन आपके पास एक रूपये कम हो और आप उसे एक टॉफी पकड़ाए तो वो कभी नहीं लेगा।
यहां पर कुछ ऐसे होता, जब दुकानदार टॉफी का डब्बा लाता तो उसे एक टॉफी 80 पैसे की पड़ती। इस तरह वो 5 टॉफी बेचकर 1 रुपया बचा लेता। आपको नहीं चाहिए होता फिर भी आप टॉफी ले लेते। इस तरह से ये 20 पैसे का अति लघु घोटाला संपन्न होता।
टिकट घोटाला, यह घोटाला बस टिकट में होता जिसका शिकार ग्रामीण और शहरी दोनो परिवेश के लोग होते। जब आप बहुत ही छोटी दूरी तय करते तो बस वाला 5-6 रूपये ले तो लेता लेकिन उसका टिकट नहीं बनाता या फिर टिकट लेते वक्त जितना पैसा कंडक्टर को वापस करना होता उसको टिकट के पीछे लिख देता। जब बाद में वो कहता की जिसका पैसा बाकी है वो पैसा ले लें। तो अगर आपके टिकट के पीछे 1रुपया लिखा रहता और आप छोड़ देते कि 1 रुपया में क्या रखा है लेकिन वही अगर टिकट लेते वक्त एक रुपया कम हो तो कंडक्टर टिकट नहीं देता। इस घोटाले के ज़िम्मेदार आप ख़ुद होते। ऐसे ही आप इस अति लघु टिकट घोटाला को संपन्न करते।
नौकरी घोटाला, ये घोटाला आजकल बहुत तेज़ी से हो रहा जिसका शिकार नौजवान लोग हो रहें। इस घोटाले के कई सारे तरीके हैं। ये घोटाला छोटे और बड़े दोनो स्तर पर होता। इसमें आपको नौकरी की तलाश करनी होगी। फिर आपको ऑनलाइन एक विज्ञापन मिलेगा जो नौकरी देने का दावा करेगा। आपको वहां संपर्क करना होगा। एक महिला आपको कॉल करेगी, मधुर बोली में आपको समझाएगी और पूछेगी क्या आप आवेदन करना चाहते/चाहती हैं। आप हां कह देंगे और आप आवेदन शुल्क जमा कर देंगे। या फिर आपसे सुरक्षा शुल्क मांगा जाएगा और कहा जायेगा कि नौकरी लगने के एक सप्ताह बाद या पहली तनख्वाह के साथ वापस कर दिया जायेगा। आप सुरक्षा शुल्क जमा कर देंगे। आप मन ही मन खुश होंगे कि आखिर कर नौकरी मिल ही गई। वो आपसे कहेंगे कि दो-तीन दिन बाद आपको कंपनी के तरफ से कॉल किया जाएगा या एक-दो सप्ताह में आपके पास ज्वाइनिंग लेटर जायेगा जिसके अनुसार आपको नौकरी पर आना होगा। आप इंतजार करते रह जायेंगे, ना कोई कॉल आयेगी ना कोई ज्वाइनिंग लेटर। उनसे संपर्क भी समाप्त हो जायेगा। तब आपको पता चलेगा की ये तो घोटाला हो गया। इसमें शुल्क 50 रूपये से लेकर 500 रूपये तक हो सकता या फिर कभी-कभी हज़ार रूपये तक। नौकरी के चक्कर में लोगों के साथ लाखों तक का घोटाला हो जाता।
ऐसी ही जीवन में कई सारे छोटे से बड़े घोटाले होते रहते। कभी जानबूझकर, कभी अनजाने में तो कभी ज्ञान के कमी से आप इसका शिकार हो जाते। जबतक आप सब इसके खिलाफ़ आवाज नहीं उठाएंगे तबतक ये और भी ज्यादा होगा। एक रुपया हो या एक पैसा, है वो आपका ही। आप पूरे हक़ से अपना पैसा लें।
यही एक रुपया ना लेना कल आपका एक लाख तक का नुकसान करा सकता। इसलिए ज़रूरी है कि शिक्षित बनें, जागरूक बनें।
- ग़ैर