SHRUTIKAVYAM
By- Omkar Singh 'Ghair'
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कभी और

मिलूंगा मैं तुमसे, करूंगा तुमसे बातें, चलूंगा साथ तुम्हारे, पर अभी नहीं, कभी और। अभी बहती हुई ज़िंदगी के भंवर में हूं। नए सपनों के नए सफ़र म...
मिलूंगा मैं तुमसे,
करूंगा तुमसे बातें,
चलूंगा साथ तुम्हारे,
पर अभी नहीं, कभी और।
अभी बहती हुई ज़िंदगी के भंवर में हूं।
नए सपनों के नए सफ़र में हूं।
सुनता-समझता तुम्हारी भी बात को,
पर मैं अपने दिल के असर में हूं।
अभी करना है पार अनगिनत जहान को।
चुकाना है मुझे कुछ अमूल्य एहसान को।
चाहता तो तुम्हें भी ले चलता अपने साथ मैं,
पर रास्ता तुम्हारा घर को है, मेरा है शमशान को।
नहीं आता रास ये सबकुछ,
ये चंद लम्हों की बातें हैं।
ये चांदनी भरी रातें,
ये मुलाकातें, बस बातें हैं।
एक उम्र गुजार दी है इसमें,
ख़ुद का ख़ुद से सौदा किया।
मैं ख़ुद से मिलने वाला था,
पर ख़ुद को ख़ुद से लौटा दिया।
चाहो तो साथी बन जाओ,
हमसफ़र में शायद सदी लगे।
बात समंदर सी गहरी हैं,
शायद तुम्हें नदी लगे।
अब उम्र चुरा ली है सारी,
बस जिऊंगा अपना दौर।
फिर तो बस तुम्हारा हूं,
पर अभी नहीं, कभी और।
- ग़ैर