SHRUTIKAVYAM
By- Omkar Singh 'Ghair'
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मैं कौन हूं?

बुझ जाऊंगा या मैं बुनियाद हिला दूंगा। डूबा दूंगा तुझे या साहिल से मिला दूंगा। हलका हूं तो क्या हुआ,बातों का भारी हूं। ख़ुद के दम खड़ा,मैं आग...

बुझ जाऊंगा या मैं बुनियाद हिला दूंगा।
डूबा दूंगा तुझे या साहिल से मिला दूंगा।
हलका हूं तो क्या हुआ,बातों का भारी हूं।
ख़ुद के दम खड़ा,मैं आग़ नहीं,चिंगारी हूं।

ना कल था,ना कल हूं,मै आज हूं।
नज़रों के सामने मैं,नज़रअंदाज हूं।
पढ़कर समझ लो,ना वो किताब हूं।
तुम्हारी सोच के परे,मैं बेहिसाब हूं।

पहले मजहब फिर मुझे जाति में बांट दिया।
रिश्ते बने इंसान से, इंसानियत ने डांट दिया।
चुप नहीं रहता मैं,शोर करता बे-आवाज़ हूं।
ख़ुश रखा लोगों ने पर ख़ुशी से मैं नाराज़ हूं।

मैं 'ग़ैर' हूं, मुझे 'ग़ैर' ही रहने दो।
मत पढ़ो मुझे पर बात कहने दो।
जितना भी भर लू पर मै कम हूं।
क्यों कि मैं 'मैं' नहीं मैं 'हम' हूं।
-ग़ैर