SHRUTIKAVYAM
By- Omkar Singh 'Ghair'
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सईयां आवत नाहीं।

याद आवत, सईयां आवत नाहीं, गए परदेश। दिल नाही लागत,मन में होत बा रोज कलेश। याद आवत, सईयां आवत नाहीं, गए परदेश। धोती छोड़ी पेंट-शर्ट पहने, बना...
याद आवत, सईयां आवत नाहीं, गए परदेश।
दिल नाही लागत,मन में होत बा रोज कलेश।
याद आवत, सईयां आवत नाहीं, गए परदेश।
धोती छोड़ी पेंट-शर्ट पहने, बनावे कैसा भेश।
सेपु लगे कडीशनर लगे,जुल्फी उड़ावे हवे में।
मजे में बीते उनका जवानी,हमार बीते दवे में।
हमार बीते दवे में, सखी! हमार बीते दवे में।
भये शहरी बाबू, हम रही गए एक ही गंवे में।
दुई चूड़ी भेज भूलवात,कुछु भेजत ना बिशेष।
याद आवत, सईयां आवत नाहीं, गए परदेश।
ये सखी! अपने रनिया के भूल गए का नरेश?
याद आवत, सईयां अवात नाहीं, गए परदेश।
- ग़ैर