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By- Omkar Singh 'Ghair'
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वो हाथ!

वो हाथ जिनके साथ उम्र गुजारी थी, वो हाथ जो हमेशा सही राह दिखाए थे, जो आंख बन गए थे सफ़र में मेरे, जिनके सहारे हमनें कई मुश्किलें पार की, जो ...
वो हाथ जिनके साथ उम्र गुजारी थी,
वो हाथ जो हमेशा सही राह दिखाए थे,
जो आंख बन गए थे सफ़र में मेरे,
जिनके सहारे हमनें कई मुश्किलें पार की,
जो हाथ मेरे हाथों को हाथ में लिए थे,
वो हाथ मेरा कवच बन गए थे।
मुझे डर नहीं लगता खंजर छुपाए फूलों से,
मुझे डर नहीं लगता मर जाने से,
मुझे डर नहीं लगता बिछड़ जाने से,
मुझे डर लगता है टूट जाने से।
वैसे तो खंजर मेरा कुछ ना बिगाड़ सका,
पर वो फूल जो लाए थे वो वही हाथ थे।
                  - ग़ैर