SHRUTIKAVYAM
By- Omkar Singh 'Ghair'
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आशिक़

उसे चोट लग गई फिर भी हंसते जा रहा, ज़रूर किसी ज़माने में आशिक़ रहा होगा।
उसे चोट लग गई फिर भी हंसते जा रहा,
ज़रूर किसी ज़माने में आशिक़ रहा होगा।