SHRUTIKAVYAM
By- Omkar Singh 'Ghair'
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आग सीने में

ये ठंड ! क्या ख़ाक बिगाड़ पाओगी तुम, आग सीने में यहां सदियों से जल रही।

ये ठंड ! क्या ख़ाक बिगाड़ पाओगी तुम,
आग सीने में यहां सदियों से जल रही।