SHRUTIKAVYAM
By- Omkar Singh 'Ghair'
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वतन के लिए

ख्वाहिश थी वतन के लिए जान कुर्बान कर दूंगा, लोगों को आपस में लड़ता देख इरादा बदल गया।
ख्वाहिश थी वतन के लिए जान कुर्बान कर दूंगा,
लोगों को आपस में लड़ता देख इरादा बदल गया।