SHRUTIKAVYAM
By- Omkar Singh 'Ghair'
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गुज़ारा

तुम्हारे पहलू में आ जाने से सिर्फ़ तुम्हारा नहीं होता, मैं वो पंछी हूं जिसका एक पेड़ पे गुजरा नहीं होता।
तुम्हारे पहलू में आ जाने से सिर्फ़ तुम्हारा नहीं होता,
मैं वो पंछी हूं जिसका एक पेड़ पे गुजरा नहीं होता।