SHRUTIKAVYAM
By- Omkar Singh 'Ghair'
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अश्क़
होती अगर मालियत-ए-अश्क़ होता सबसे रईस मैं, अफ़सोस मगर ख़सारे में हर दिन गुज़ारना पड़ रहा।
होती अगर मालियत-ए-अश्क़ होता सबसे रईस मैं,
अफ़सोस मगर ख़सारे में हर दिन गुज़ारना पड़ रहा।
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